मैं समय हूँ जो किसी के बंधन में नही बंधा मेरा कोई अस्तित्व नही है ना मेरा कभी जन्म हुआ न में मर सकता हूँ । इस सृष्टि का निर्माण मेरे द्वारा ही हुआ है। जीवन की उत्पत्ति और जीवन का अंत का रचयिता मै ही हूँ। मैं सबकी समझ से परेह हूँ। कोई मुझे ईश्वर तो कोई खुदा कहता है सब जीव मेरी ही संतानें है। मैं ही हूं सबका पालन पोषण करने वाला सब को परेशानी देने वाला और सबको खुशी देने वाला। लोग मेरे साथ चलना तो चाहते और मुझे अपने हाथों में बंध कर अपने पास रखना चाहते है पर मैं छल के साथ एक पल में आगे बढ़ जाता हूँ। लोगों की उम्र बीत जाती है मुझको को हराने में पर
मैं दुनिया को सब सिखाता पर दुनिया मुझे कभी समझ ही न पाती लोग बदलते जगह बदलती पर वो मैं ही हूँ जो सिर्फ अपना रूप बदलता।मैं लोगो को कठपुतलियों की तरह नचाता पर लोग है जो मुझको घड़ी बनाकर अपनी उम्र घटाते मैं ऐसा सबको करते देख मन ही मन खुश हो जाता मैं अजर अमर हूँ।
आज के समय मे इंसान इतना व्यस्त हो गया है कि उसको ये याद नही की उसका जन्म लेने क्या मकसद था।
Comments
Post a Comment