हीरा की मेहनत

महीनों से सफेद बर्फ की चादर सी पड़ी हुई थी जिसकी बजह से लोग धूप को तरस रहे थे और ज्यादा सर्दी होने के लोगो ने घर से बहार निकलना बंद कर दिया मानो जैसा सब कुछ रुक सा गया हो कुछ समय बाद दिन बड़े और राते छोटी होने लगती है और जो बर्फ की चादर बनी हुई थी अब वह धीरे धीरे पिघल रही थी क्योंकि अब मौसम में गर्माहट आने लगी थी चारो तरफ भोरे और तितलियां मंडरा रही थी जिसकी वजह से रंग बिरंगे फूल खिल रहे थे यह कहानी एक ऐसे बैल की है जो जीवित रहते हुए अपने मालिक को कभी निराश नही किया। हीरा नाम का एक बछड़ा था जिसे कुछ लोग पकड़ कर मारने वाले थे वही से राम नाम का एक व्यक्ति निकल रहा होता है उसकी नजर उस बछड़े पर पड़ जाती है जिसकी वजह से वह उस बछड़े को बचाने के लिए कई प्रयास करता है और उसको बचा लेता है परंतु इसके बदले उसे उन कसाईयो को 5 हजार रुपये दे देता है अब वह हीरा को अपने घर ले आता है जहाँ पर उसकी पत्नी रजनी उस बछड़े को लात देख भड़क जाती है जिसकी बजह से दोनों में बहुत झगड़ा होता है राम उस बछड़े को जिद करके अपने पास रख लेता है राम के कोई भू भाग नही है वह किसी अन्य के यहाँ पर पटिया पर खेती करता है जिस से उसे मुश्किल से 4 हजार ही कमाई हो पाती है अब वह हीरा को पलता है धीरे धीरे हीरा कुछ समय बाद बढ़ा होने लगता है अब राम उसे अपने साथ खेत पर ले जाने लगता है जिस की बजह से उसकी मेहनत कम और आमदनी ज़्यादा होने लगती है और ये सब हीरे की वजह से होता है लेकिन रजनी अभी भी उस से नफरत करती है और हीरा को खाने के नाम पर दुत्कार देती है लेकिन उसे रजनी की बात का बुरा नही लगता पर उसे अपने मालिक पर पूरा विश्वास है कि वह जरूर उसे रोटी खिलाएंगे अब राम के पास अपनी जमीन भी आ जाती है और वह इन सबका श्रेय हीरा की मेहनत को देता है अब बैल के आने से उन दोनों की ज़िंदगी मे खुसिया आने लगी अब रजनी को भी हीरा से प्रेम होने लगा परतुं राम की तरक्की गाँव  तरक्की देख कर लालू उस से बहुत जलता था और वह अंदर ही अंदर बहुत जलने लगा अब वह राम से बदलना लेना चाहता है अब एक दिन बात है जब राम और रजनी अपने घर जा रहे थे शादी में और राम का जाने का मन नही कर रहा था क्योंकि उसे हीरा की बहुत चिंता थी पर हीरा की देख रेख के लिए वह अपनी चाची सुधा से बोल जाता है कि एक दिन के लिए मेरे हीरा का ख्याल रख लेना बस एक दिन बाद में आकर उसे ले जाऊंगा और वह रजनी के कहने पर चल देता है पर राम के जाने पर हीरा बहुत उदास हो जाता है अब शाम का वक्त था सुधा अपने खेत पर चली गयी और उसने हीरे को खाना और पानी कुछ नही दिया जिसकी बजह से वह भूख और प्यास से परेशान होने लगा रात का समय था वहां से लालू गुजर रहा था तो उसने देखा कि राम के घर पर कोई नही है और हीरा भी भूखा लग रहा था तो उसने राम से बदलना लेने के लिए उसने हीरे को एक रोटी दी जिस की वजह से उसे लालू पर विश्वास हो गया और उसने लालू के हाथ से 8 रोटी खा ली परतुं अंत मे जब पानी की बारी आई तो उसने हीरा को मारने के लिए पानी में जहर मिला दिया और हीरा और वह पानी पी लेता है पानी पीने के कुछ समय बाद हीरा की हालत बहुत खराब होने लगती है हीरा दर्द के कारण तड़प रहा था अब सुबह का समय था राम और रजनी बापस लौट के आने वाले थे राम सबसे पहले सुधा के पास जाता है हीरा का भोजन के बारे में पूछता है पर सुधा के न कहने पर वह सुधा पर क्रोद्धित हो जाता है और खुद आपने हाथ से हीरा के लिये रोटी और पानी लेकर जाता है घर जाने पर उसके पैरों तले जमीन खिसक जाती है क्योंकि हीरा दर्द के मारे तड़प रहा था कुछ देर बाद सुधा और रजनी भी आ जाती है हीरा की ऐसी हालत देख रजनी दुखी हो जाती है और राम जल्दी ही हीरा का सिर अपने पेर पर रख लेता है राम हीरा की आंखों में देखता है तो उसकी आंखों से सिर्फ और सिर्फ आँसू निकल रहे थे और ये आँसु दर्द के नही प्रेम के थे ऐसा लग रहा था जैसे हीरा मरने से पहले अपने मालिक से ये कहना चाहता हो कि में आपके सपने को पूरा नही कर पाया अब वह शायद अगले जन्म में अपने मालिक का कर्ज उतारने की बात कह रहा हो और राम उसकी बातों को भली भांति समझ रहा था निरंतर राम की आंखों से आंसू आने लगे थे क्योंकि हीरा के शरीर ने हाल चल करना बंद कर दी थी और इसी वजह राम और रजनी बहुत जोर से रोने लगे और आसपास का पुरा माहौल गमनिया हो गया था कुछ समय बाद हीरा के जाने के बाद राम फिर से निर्धन हो गया और आर्थिक तंगी के कारण उसकी हालत ठीक नही थी और वह बीमार रहने लगा और उसको भी कई सारी बीमारियों ने घेर लिया जिसके बजह से उसकी भी मौत हो गयी फिर से दोबारा सर्दी का मौसम शुरू होने वाला था फूलो पर औस की बूंदे गिरने लगी सब कुछ बदल सा गया और परिवर्तन सृष्टि का नियम है 

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